रायपुर। नौकरी में बने रहने और प्रोन्नति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने बड़ी लड़ाई लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। संघ का कहना है कि शिक्षकों की नियुक्ति जिन शर्तों पर हुई थी, उन्हीं शर्तों के आधार पर उनकी नौकरी जारी रहनी चाहिए और प्रोन्नति भी मिलनी चाहिए।
संघ ने साफ किया है कि नियुक्ति के समय यदि टीईटी जरूरी नहीं थी, तो अब बीच में नियम बदलकर इसे थोपना अनुचित है। इस मुद्दे पर संघ सरकार से नियमों में संशोधन की मांग करेगा। साथ ही कानूनी लड़ाई की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश बना विवाद की जड़
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को दिए फैसले में कहा था कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर टीईटी पास करनी होगी। ऐसा न करने वालों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी। इसके अलावा, प्रोन्नति के लिए भी टीईटी पास करना जरूरी कर दिया गया है।
हालांकि, जिनकी नौकरी में पांच साल से कम अवधि बची है, उन्हें टीईटी से छूट दी गई है, लेकिन प्रोन्नति के लिए उन्हें भी परीक्षा पास करनी होगी।
शिक्षक संघ का रुख
शिक्षक संघ का कहना है कि यह फैसला लाखों शिक्षकों के लिए असमंजस और संकट की स्थिति पैदा कर रहा है। संघ का तर्क है कि नियुक्ति के समय जो शर्तें लागू थीं, उन्हीं पर भरोसा करके शिक्षक सेवा में आए थे। अब अचानक नए नियम थोपना उनके साथ अन्याय है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने राहत नहीं दी, तो यह आंदोलन और तेज होगा। साथ ही संघ ने टीईटी अनिवार्यता को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की संभावना भी जताई है।




