लखनऊ। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में सक्रिय एक बड़े मतांतरण गिरोह की चौंकाने वाली साजिश सामने आई है। गिरोह के सरगना जलालुद्दीन उर्फ छांगुर का सपना था कि वर्ष 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बना दिया जाए। इसके लिए वह और उसका नेटवर्क 2015 से हिंदू युवतियों व युवकों का मतांतरण करा रहा था।
एटीएस (ATS) की जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह को कई मुस्लिम देशों से करीब 500 करोड़ रुपये की फंडिंग विभिन्न माध्यमों से प्राप्त हुई थी। इस रकम से छांगुर ने 1,000 से ज्यादा युवकों को वेतन पर भर्ती किया था, जिन्हें मतांतरण गतिविधियों में लगाया गया था। गिरोह युवकों को 50 हजार से 1 लाख रुपये तक देता था, ताकि वे टारगेटेड परिवारों और युवाओं को अपने जाल में फंसा सकें।
यौन शोषण के भी आरोप
एटीएस द्वारा दाखिल आरोप-पत्र में एक पीड़ित महिला का बयान भी दर्ज किया गया है। महिला ने आरोप लगाया है कि छांगुर के बेटे महबूब और उसके सहयोगी नवीन उर्फ जमालुद्दीन ने धर्मांतरण के नाम पर उसका यौन शोषण और उत्पीड़न किया। इस गंभीर आरोप ने गिरोह के आपराधिक स्वरूप को और स्पष्ट कर दिया है।
आरोप-पत्र और आगे की कार्रवाई
दो सप्ताह पहले एटीएस ने महबूब और नवीन उर्फ जमालुद्दीन के खिलाफ अदालत में आरोप-पत्र दाखिल कर दिया है। वहीं, छांगुर, नीतू उर्फ नसरीन और अन्य गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ भी जल्द आरोप-पत्र दाखिल करने की तैयारी चल रही है।
अंतरराष्ट्रीय फंडिंग का नेटवर्क
जांच एजेंसियों का कहना है कि छांगुर और उसका नेटवर्क हवाला चैनल, एनजीओ और दान के नाम पर विदेशों से धन प्राप्त करता था। यह रकम मुख्य रूप से युवाओं को लुभाने, उन्हें नौकरी का झांसा देने और मतांतरण कराने में खर्च की जाती थी। गिरोह ने कई राज्यों में अपने स्लीपर सेल बना रखे थे, जो अलग-अलग जिलों और कॉलेजों में सक्रिय थे।
एटीएस की सख्ती
उत्तर प्रदेश एटीएस ने इसे राष्ट्रविरोधी साजिश मानते हुए जांच को और तेज कर दिया है। एजेंसी अब उन विदेशी स्रोतों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने इस नेटवर्क को धन मुहैया कराया। साथ ही गिरोह से जुड़े संभावित और छिपे हुए सहयोगियों की तलाश की जा रही है।




